बस तुझे ही ढूँढे मेरी नज़र

तेरे नैनों ने किया है ऐसा असर

तेरे नैनों ने किया है ऐसा असर
हो गया हूँ मैं बेख़बर
बस तुझे ही निहारूँ हर पहर
और बस, और बस मुझे है तेरी फ़िकर।

शुकर-शुकर, हे रब तेरा शुकर
बस तुझे ही ढूँढे मेरी नज़र।


देखा है तुमको जब से
खोया-खोया हूँ तब से
माँगता हूँ तुझको रब से
तू है मेरी साँसे, मेरा ज़िगर।

शुकर-शुकर, हे रब तेरा शुकर
बस तुझे ही ढूँढे मेरी नज़र।


तेरी नैना कहती हैं मुझसे
सागर की लहरें चाँद से जैसे
कोई रिश्ता हो मेरा तुमसे
दिल में है बस तेरा बसर।

शुकर-शुकर, हे रब तेरा शुकर
बस तुझे ही ढूँढे मेरी नज़र।


श्रद्धा से:

अविनाश कुमार राव
शिक्षक (हिंदी और संस्कृत)
दिल्ली पब्लिक स्कूल फूलबाड़ी, जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल
मोबाइल नंबर: 7754054211
ईमेल: avinash.rao1234@gmail.com

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