दृश्य तीन
(सात वर्ष बाद ग्रेजुएशन में अपने नए मित्रों के साथ)
नवीन – राजीव तुमने क्या सोचकर ग्रेजुएशन में प्रवेश लिया हैं ? आगे क्या करना है?
राजीव – (कुछ देर रूककर ) मैं आईपीएस बनूँगा ?
नवीन – क्यों ? तुम जानते हो कितनी मेहनत करनी पड़ती है इसमें ?
राजीव – हाँ, हाँ अच्छी तरह से I ये तो मेरा प्रथम प्रयास में ही निकल जाएगा ?
नवीन – क्यों इस नौकरी में जाना चाहते हो ?
राजीव – अरे यार इसमें रूतबा है I सरकारी नीली बत्ती वाली गाड़ी, नौकर और बँगला मिलेगा I सब अधिकारी डरते हैं
इससे I
नवीन – यार, मैंने सुना है खूब रिश्वत भी मिलती है I
राजीव – हाँ यार, सही कह रहे हो I लोग सही काम कराने के लिए भी लाख रुपये दे देंगे I थोड़ा-सा डरा दो तो पेटी भर
कर भी मिल जाएँगे I
नवीन – मेरे लिए भी कभी-कभी सहयोग कर देना भाई I
राजीव – वो तो तुम्हारे एक बार के कहने में ही हो जाएगा I



