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तेरी रचना

जिस दिन चाँदइठला रहा होगा,ईश्वर ने हूर कागुरूर तोड़ने कोतुझे रच रहा होगा। जिस महल मेंतेरा वास होगा,शायद अंधकारहिमालय की गुफाओं मेंछिप रहा होगा। जब रात चाँदनिकलता होगा,तुझे देखकरशायद शर्म के मारेबादलों में छिप रहा होगा। जब तुम्हाराबाग़ जाना होगा,तुम्हारी मुस्कान देखशायद गुलाब भीमुरझा रहा होगा। जब तुम्हें चलतेदेखता होगा,शायद हिरनअपना मटकनाभूल गया होगा। तुम्हारी …