मैं निर्मल एक बूँद हूँ I

जग की आत्मा प्रकृति रचयिता सर्वत्र व्याप्त मैं निर्मल एक बूँद हूँ II पपीहे की प्यास बुझाती, बाँस को बंसलोचन बनाती फसलों में फली लाती सीप में मोती बनाती हूँ मैं निर्मल एक बूँद हूँ II सागर से उठकर नभ में उड़ जाती वाष्प बन कर बादल बनाती एक होकर फिर वही सागर बन जाती …

हे शारदे माँ वर हमें ज्ञान दो

हे! श्वेत कमलासिनीमाँ हंस वाहिनीमेरे जीवन के तम दूर करकोना-कोना उजाला से भर दो |हे! शारदे माँ, वर हमें ज्ञान का दो ||                    हे अंबे! वीणापाणि                    ज्ञान प्रदान कारिणी                    हमारे अज्ञान  हर कर                    अन्तःकरण विद्या से सम्पूर्ण कर दो |                    हे! शारदे माँ, वर हमें ज्ञान का दो ||हे! माँ भारतीसुधियों में पूजिनीनष्ट कर विघ्न बाधाहिंदी साहित्य श्रद्धा को उत्तीर्ण कर …

सूर्य

“सूर्य सम्पूर्ण सृष्टि का आधार है। प्रस्तुत कविता में सूर्य के उदय, उसकी ऊर्जा, प्रकाश और जीवनदायी सभी स्वरूप का सुंदर वर्णन किया गया है। यह कविता विद्यार्थियों एवं साहित्य प्रेमियों के लिए सरस बनाने का प्रयास किया गया है I” मनोरम होता है कितनाप्रातः पूर्व अरुणिमा में उगना,जग जगाते हुए उदय होनासूर्य से आलोकित …

कक्षा VI दीपकम् पाठः 1 वयं वर्णमालां पठामः (प्रश्नोत्तरम्)

पाठः 1                                                                            वयं वर्णमालां पठामः ‘वयं वर्णमालां पठामः’ पाठ में विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा की वर्णमाला से परिचित कराया गया है। इस पाठ के माध्यम से स्वर और व्यंजन अक्षरों का ज्ञान सरल एवं रोचक ढंग से दिया गया है। इसमें बच्चों को सही उच्चारण, पढ़ने की विधि तथा वर्णों की पहचान सिखाई जाती है। …

स्कूल जाते बच्चे

कर्म की कुशलता

(एक दिन में एक पत्रिका को पढ़ते हुए एक लघुकथा लिखने के लिए प्रस्ताव पाया जिसका शीर्षक था कर्म की कुशलता पर उसे प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि अगले दो दिन में समाप्त होने वाली थी I तुरंत विचार किया और इस लघुकथा को लिख दिया I आइए पढ़ते हैं कर्म की कुशलता …) एक …

माँ की कमी

सीमेंट के टीने वाले कमरे में विद्यालय में सत्र के पहले दिन कक्षा दस में सभी छात्र मिले I नए छात्र तो पहले दिन से आ रहे थे पर, दसवीं के फेल छात्र दिन पर दिन एक-एक करके बढ़ रहे थे I उसमें भी जो एक या दो अंक से फेल थे वही शुरू किए …

संस्कृतम्-संस्कृतभारती-षष्ठी कक्षा- दशमः पाठः

✨ दशमः पाठः — षष्ठी विभक्ति (सम्बन्धकारकः) चतुरः शृगालः अभ्यासः प्रश्नः 1. संस्कृत में उत्तर दें। क. काकस्य मुखे किम् अस्ति ?ख. कः एतत् मांसखण्डम् इच्छति ?ग. कस्य वर्णः कृष्णः ?घ. कस्य मुखस्य मांसखण्डम् अधः पतति ?ङ. कः चतुरः अस्ति ? उत्तरम् –क. काकस्य मुखे मांसखण्डम् अस्ति।ख. शृगालः एतत् मांसखण्डम् इच्छति।ग. काकस्य वर्णः कृष्णः।घ. काकस्य …

प्रतीकात्मक दीपक

दीपक ने ही दिखाया

एक रात जब अँधेरे में ढिबरी जलायाखिड़की से चाँद को झाँकते पाया, बादलों से निकलते, छिपतेशायद मुझे चिढ़ा रहा थामुझे नहीं मालुम, या बुला रहा था, पर मैं खुश था अपनी ढिबरी की रोशनी से,यह वही दीपक हैजो ज्ञान की ज्योति जलायागूढ़ विषयों को बताया,जब भी आया तम का छायाहमेशा अपने साथ यह दीपक ही …

संग देश हमारा चलता है 

कक्षा 5 गुंजन (मधुबन) पाठ 1 संग देश हमारा चलता है  अभ्यास  मौखिक: क. भारत के बच्चे क्या करते हैं ?                                                                        …

गणनया ज्ञानम्

‘गणनया ज्ञानम्’ मम रचना सङ्ख्याविषये अस्ति I येन माध्यमेन प्रसिद्धवस्तूनां ज्ञानं भवति I सामान्यज्ञानं वर्धतैव -१: एकःजगात्येका माता वसुधा, पिता नभ:शशि: भास्करश्चास्ति एकैश्वर: Iचालयति जीवस्य जीवनमेक: प्राणः एका सङ्ख्या गण्यते सर्वप्रथमा I२: द्वौशरीरस्य स्तः आधारौ द्वौपादौ चलनाय, श्रवणाय कर्णौ,हस्तौ ग्रहणाय लेखनाय च नेत्रे द्रष्टुञ्चदम्पति: कुलवर्धनाय पालने च I३: त्रयःब्रह्माण्डे भवन्ति त्रयः लोका:ब्रह्मा विष्णु: महेशश्च सृष्टिकर्तारश्च,त्रिनेत्रधारकशिवं …

लेखनी

मैं लेखनी हूँ

पतली लघ्वी देह मेंजेबों में, लघु संदूकों में,हर दफ्तर में उपस्थितसाक्षरता प्रतीक वाहिका हूँ I मैं लेखनी हूँ I नीले, काले, हरे, लाल रंगों मेंप्रति स्थान, पद रूप अनेक,नियम, नव निर्माण, संशोधनमानस पटल की उद्गार कर्तृ हूँ I मैं लेखनी हूँ Iहर परिक्षाओं की सहगामिनीजीवन में हर मोड़ पर साथी,सबके सुख-दुःख की कहानीकोरे पन्नों की …